Jagdeep Dhankar :जब कोई जिम्मेदार व्यक्ति अचानक एक बड़ी कुर्सी छोड़ दे, तो देश की जनता के दिलों-दिमाग़ में कई सवाल उठने लाज़मी हैं। ठीक ऐसा ही हुआ जब देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इस ख़बर ने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि आम लोगों के मन में भी एक बेचैनी सी पैदा कर दी – आखिर ऐसा क्यों हुआ? अब आगे क्या होगा?
74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफ़े में कहा कि अब वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजे पत्र में संविधान के अनुच्छेद 67 (ए) का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफ़ा देने की बात कही। उन्होंने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पद संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने खुद को इस पद से अलग कर लिया।
उपराष्ट्रपति का पद खाली होने के बाद क्या होता है?
भारत में उपराष्ट्रपति का पद, राष्ट्रपति के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। संविधान के अनुसार जब यह पद किसी भी कारणवश खाली होता है – चाहे वो निधन हो, इस्तीफ़ा हो या पद से हटाया जाना – तो चुनाव आयोग को इस पद को जल्द से जल्द भरने की जिम्मेदारी दी जाती है।
संविधान के अनुच्छेद 68 (2) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसी स्थिति में “जितनी जल्दी हो सके” चुनाव कराना ज़रूरी है। हालांकि, जब कार्यकाल समाप्त होने वाला हो, तब तो चुनावी प्रक्रिया 60 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाती है, लेकिन अचानक पद खाली होने पर चुनाव की समयसीमा को लेकर कोई स्पष्ट सीमा नहीं दी गई है। ऐसे में चुनाव आयोग को जल्द निर्णय लेना होता है।
उपराष्ट्रपति कैसे चुना जाता है?
इस पद के लिए देश की जनता सीधे मतदान नहीं करती। भारत के संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों द्वारा किया जाता है। यानी यह चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज के ज़रिए होता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य भाग लेते हैं।
यह मतदान गुप्त होता है और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम के माध्यम से किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि चयन निष्पक्ष और प्रतिनिधित्व के आधार पर हो।
उपराष्ट्रपति बनने की क्या योग्यता होनी चाहिए?
अगर आप सोच रहे हैं कि उपराष्ट्रपति बनने के लिए किन योग्यताओं की जरूरत होती है, तो संविधान ने इसके लिए कुछ बुनियादी शर्तें तय की हैं।
- उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।
- उसकी उम्र 35 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
- उसे राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए।
- वह किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए – यानी वह भारत सरकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण में किसी प्रकार की नौकरी में न हो।
इस्तीफ़े के बाद उपराष्ट्रपति की ज़िम्मेदारी कौन संभालता है?
यह एक बहुत ही दिलचस्प और जरूरी सवाल है। जब उपराष्ट्रपति इस्तीफ़ा दे देते हैं, तो उस दौरान उनकी ज़िम्मेदारियाँ कौन निभाता है?
भारत के संविधान में उपराष्ट्रपति का सबसे अहम दायित्व राज्यसभा के सभापति का होता है। ऐसे में अगर उपराष्ट्रपति इस्तीफ़ा दे दें, तो संविधान के अनुसार यह कार्य राज्यसभा के उपसभापति द्वारा संभाला जाता है, या फिर कोई अन्य सदस्य जिसे राष्ट्रपति द्वारा अधिकृत किया गया हो।
इसका मतलब यह हुआ कि देश की संसदीय कार्य प्रणाली में कोई रुकावट नहीं आती और एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत काम चलता रहता है।
कौन हैं जगदीप धनखड़: एक नज़र उनके सफर पर
जगदीप धनखड़ का जीवन एक प्रेरणा की तरह है। राजस्थान के एक छोटे से गांव किठाना (झुंझुनू) में जन्मे धनखड़ ने गांव के स्कूल से पढ़ाई की और फिर स्कॉलरशिप के ज़रिए चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल पहुँचे। फिज़िक्स ऑनर्स में स्नातक की डिग्री के बाद, उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की।
उनकी वकालत की शुरुआत 1979 में हुई, और 1990 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता की मान्यता मिली। वे सुप्रीम कोर्ट में भी नियमित रूप से वकालत करते रहे। उनका राजनीतिक जीवन 1989 में जनता दल से शुरू हुआ, जब उन्होंने झुंझुनू लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। 1990-91 में वे केंद्रीय राज्य मंत्री भी रहे। समय के साथ उन्होंने कांग्रेस और फिर 2003 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। वे किशनगढ़ विधानसभा से विधायक भी रह चुके हैं।
आगे क्या?
धनखड़ के इस्तीफ़े ने यह एक बार फिर साबित किया कि कोई भी संवैधानिक पद हो, वह व्यक्ति से ऊपर होता है और देश के लोकतंत्र की ताकत इसकी व्यवस्था और नियमों में है। अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर हैं कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा और कब तक चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
निष्कर्ष:-
जगदीप धनखड़ का इस्तीफ़ा भले ही उनके निजी स्वास्थ्य कारणों से हो, लेकिन यह एक बड़ी संवैधानिक घटना है। यह हमें इस बात की याद दिलाता है कि जिम्मेदारी के बड़े पदों पर इंसान की सीमाएं भी होती हैं। देश को उनके योगदान के लिए धन्यवाद देना चाहिए और साथ ही उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करनी चाहिए।
Disclaimer:- यह लेख सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें प्रस्तुत जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और संवैधानिक प्रावधानों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष का समर्थन या विरोध करना नहीं है।
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