Skill India Mission: आज के बदलते भारत में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है – एक मजबूत और सुरक्षित करियर बनाना। खासकर लड़कियों के लिए, जहां परिवार की ज़िम्मेदारियाँ और सामाजिक सीमाएँ अक्सर उनके सपनों की उड़ान को रोक देती हैं। लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। केंद्र सरकार ने ‘कौशल भारत मिशन’ के तहत एक नई रोशनी दिखाई है, जिसमें देश की बेटियों को आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा रहा है।
लड़कियों को सशक्त बना रहे हैं ये खास प्रशिक्षण कार्यक्रम
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने लोकसभा में जानकारी दी कि सरकार ने स्किल इंडिया मिशन (SIM) के ज़रिए युवाओं, विशेषकर महिलाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कई योजनाओं को लागू किया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), जन शिक्षण संस्थान (JSS), राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS) और क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (CTS) जैसी योजनाएं युवाओं को इंडस्ट्री के अनुरूप प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।
अब ट्रेनिंग में नहीं है दूरी और डर, महिलाओं को मिल रहा है पूरा सहयोग
सरकार ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष इंतज़ाम किए हैं जैसे – यात्रा के लिए सहायता, ठहरने और खाने की व्यवस्था और प्रशिक्षण के बाद नौकरी खोजने में सहायता। PMKVY 4.0 में महिलाओं को प्राथमिक लाभार्थी के रूप में चुना गया है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिटेल, हेल्थकेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, हस्तशिल्प और परिधान जैसे क्षेत्रों में ऐसे कोर्स डिजाइन किए गए हैं जो लड़कियों को आकर्षित करें और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाएं।
गाँव की बेटियाँ भी अब सीख रही हैं हुनर
सरकार द्वारा स्थापित ‘स्किल हब’ और ‘स्पेशल प्रोजेक्ट्स’ का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देकर उन्हें काम के काबिल बनाना है। इसका असर साफ़ दिख रहा है – अप्रेंटिसशिप योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी 2024-25 के 22.79% से बढ़कर 2025-26 में 25.80% हो गई है।
जब ज़्यादातर महिलाएं बन रही हैं हुनरमंद
जन शिक्षण संस्थान (JSS) योजना के तहत 80% से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं। इसके साथ ही देशभर में 19 नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTIs) और 300 से ज़्यादा आईटीआई केवल महिलाओं के लिए चलाई जा रही हैं। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी सरकारी और प्राइवेट आईटीआई संस्थानों में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण अनिवार्य रूप से लागू किया जाए ताकि राज्य अपने अनुसार इसका क्रियान्वयन कर सकें।
नव्या और स्वावलंबिनी जैसी नई पहलें – किशोरियों और महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण
MSDE द्वारा हाल ही में शुरू की गई कुछ नई पहलें भी युवतियों के जीवन को बदल रही हैं। ‘नव्या’ एक पायलट प्रोग्राम है जो 16–18 वर्ष की कम से कम 10वीं पास किशोरियों के लिए है। यह प्रोग्राम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) के साथ मिलकर तैयार किया गया है और गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने पर केंद्रित है।
वहीं फरवरी 2025 में शुरू की गई ‘स्वावलंबिनी’ योजना का उद्देश्य असम, मेघालय, मिज़ोरम, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में युवतियों के भीतर उद्यमिता का जज़्बा जगाना है। इस योजना के तहत NIESBUD (नोएडा) और IIE (गुवाहाटी) के माध्यम से प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
जब बेटियाँ कहती हैं – “अब हमें किसी पर निर्भर नहीं रहना”
इन योजनाओं का सबसे भावनात्मक पहलू यह है कि इससे लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे सिर्फ नौकरी मांगने वाली नहीं, बल्कि खुद दूसरों को रोजगार देने वाली बन रही हैं। गांव से लेकर शहर तक बेटियाँ आज यह कह रही हैं – “अब हमें किसी सहारे की ज़रूरत नहीं, हमारे हुनर ही हमारी पहचान बनेंगे।”
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई सभी योजनाएं और आँकड़े भारत सरकार और संबंधित मंत्रालयों के आधिकारिक स्रोतों पर आधारित हैं। किसी भी योजना का लाभ उठाने से पहले संबंधित सरकारी वेबसाइट या विभाग से पुष्टि अवश्य करें।






