Earthquake Afghanistan: रविवार की आधी रात अफगानिस्तान की धरती अचानक दहल उठी। घड़ी ने जैसे ही रात के 11 बजकर 47 मिनट का समय दिखाया, एक तेज़ धमाके जैसी गूंज पूरे कुनर और नंगरहार प्रांत में फैल गई। ज़मीन कांप उठी, पहाड़ जैसे हिलने लगे और पलक झपकते ही सैकड़ों घर मलबे में तब्दील हो गए। कुछ ही पलों में मासूम बच्चों, बुज़ुर्गों और परिवारों की चीखें हवा में गूंजने लगीं। यह सिर्फ़ एक भूकंप नहीं था, बल्कि मानो ज़िंदगी और उम्मीदों पर अचानक टूटा कहर था।
मलबे में दबे मासूम, चारों ओर चीख पुकार
तालिबान सरकार के अनुसार, अब तक 800 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 2,500 से ज़्यादा घायल हैं। नुरगल ज़िले के एक ग्रामीण ने बताया – “पूरा गांव उजड़ गया। बच्चे मलबे में दबे हैं, बुज़ुर्ग दबे हैं, नौजवान दबे हैं। हमें मदद चाहिए, हमारे पास उन्हें निकालने की ताक़त नहीं है।” यह पुकार किसी एक इंसान की नहीं, बल्कि पूरे कुनर की चीख बन गई है।
सादिकुल्लाह की दर्दनाक दास्तान
नुरगल के माज़ा दारा इलाके में रहने वाले सादिकुल्लाह की आंखों में अभी भी डर और आंसू तैर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह रात को अचानक गहरी गड़गड़ाहट से जागे। जब तक उन्होंने अपने तीन बच्चों को निकाल लिया, बाकी परिवार मलबे में दब चुका था। वह खुद आधा दब गए और तीन घंटे तक वहीं फंसे रहे। बाद में आसपास के लोग आकर उन्हें बाहर निकाले। उनकी पत्नी और दो बेटे अब इस दुनिया में नहीं रहे। “ऐसा लगा जैसे पूरा पहाड़ हमारे ऊपर गिर गया हो,” उन्होंने अस्पताल से कांपती आवाज़ में कहा।
मुश्किल हालात और टूटी राहें
भूकंप इतना उथला था कि इसका असर और भी विनाशकारी साबित हुआ। गांव-गांव की मिट्टी और ईंट-पत्थर के बने घर ढह गए। सड़कें टूट गईं और राहतकर्मी चार से पांच घंटे पैदल चलकर प्रभावित इलाकों तक पहुंचे। नंगरहार एयरपोर्ट से लगातार हेलीकॉप्टरों के ज़रिए घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। लेकिन अब भी कई गांव ऐसे हैं जहां से न तो शव निकाले गए हैं और न ही घायलों को बाहर लाया जा सका है।
दुनिया से मदद की अपील
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के प्रमुख फिलिपो ग्रांडी ने कहा कि यह त्रासदी अफगानिस्तान की पहले से मौजूद मानवीय चुनौतियों को और बढ़ा देगी। उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की कि राहत कार्यों में तुरंत सहयोग किया जाए। अंतर्राष्ट्रीय रेस्क्यू कमिटी ने भी चेतावनी दी है कि यह आपदा 2023 में आए भूकंप से भी अधिक भयावह मानवीय संकट पैदा कर सकती है।
पाकिस्तान तक महसूस हुए झटके
यह भूकंप पाकिस्तान तक महसूस किया गया। राजधानी इस्लामाबाद में भी धरती हिली, हालांकि वहां किसी तरह की तबाही की खबर नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अफगानिस्तान के लोगों के प्रति गहरी संवेदना जताई और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
बेघर हुए लाखों और टूटी उम्मीदें
पहले से ही अफगानिस्तान भुखमरी, बेरोज़गारी और पलायन की मार झेल रहा है। लाखों अफगान पहले पाकिस्तान और ईरान से जबरन वापस लौटे, और अब भूकंप ने उनके लिए जीना और भी कठिन बना दिया है। एक ही रात में गांव के गांव उजड़ गए, परिवार बिखर गए और जिनके घर बचे भी हैं, वे डर और बेबसी में घुट-घुटकर जी रहे हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल त्रासदी से प्रभावित लोगों की पीड़ा और वास्तविकता को मानवीय दृष्टिकोण से पाठकों तक पहुंचाना है। इसमें किसी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाने का इरादा नहीं है।
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