Samay Shrivastava: कभी भोपाल की गलियों में गेंद घुमाने वाले एक युवा स्पिनर ने शायद सोचा भी नहीं था कि किस्मत उसे भारत से हजारों किलोमीटर दूर ओमान ले जाएगी और वहां से एशिया कप जैसे बड़े मंच तक पहुंचा देगी। यह कहानी है समय श्रीवास्तव की, जिनका क्रिकेट सफर संघर्ष, धैर्य और उम्मीदों से भरा हुआ है। भारत में मौके न मिलने की कसक ने उन्हें नए रास्ते तलाशने पर मजबूर किया और यही तलाश उन्हें एक ऐसे मुकाम पर ले आई, जहां आज वह पूरी दुनिया के सामने अपने हुनर का प्रदर्शन करने को तैयार हैं।
भारत में अधूरी रह गई उम्मीदें
मध्य प्रदेश के भोपाल में जन्मे और पले-बढ़े समय श्रीवास्तव बचपन से ही क्रिकेट की दुनिया में चमक बिखेर रहे थे। अंडर-16 से लेकर अंडर-23 तक, उन्होंने हर स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया। खासकर सी.के. नायडू ट्रॉफी जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में उनकी गेंदबाज़ी ने सबका ध्यान खींचा। लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें राज्य की सीनियर टीम में जगह नहीं मिल सकी।
नया मोड़: ओमान की राह
साल 2019 में उनके कोच ज्योति प्रकाश त्यागी ने उन्हें ओमान जाने का सुझाव दिया। कोच के परिचित अहमद भाई ने समय को यहां आने के लिए प्रेरित किया। भारत में मौके न मिलने की निराशा के बीच उन्होंने जोखिम उठाया और एक नए सफर की शुरुआत की। हालांकि शुरुआत आसान नहीं थी। ओमान की गर्म जलवायु, कॉर्पोरेट लीग आधारित क्रिकेट सिस्टम और अलग माहौल उनके लिए चुनौती था। लेकिन धीरे-धीरे ओमान क्रिकेट के दिग्गज डुलेप मेंडिस और साथी खिलाड़ियों के सहयोग से वह यहां जम गए।
ओमान क्रिकेट में पहचान
साल 2022 में ओमान की टीम के लिए खेलने की पात्रता हासिल करने के बाद समय ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से सबको चौंका दिया। वह घरेलू टी20 टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने। 2022 में बहरीन के खिलाफ अपने तीसरे टी20 इंटरनेशनल मैच में उन्होंने 18 रन देकर 5 विकेट चटकाए और इतिहास रच दिया। हालांकि 2024 में वर्ल्ड कप टीम में जगह न मिलने से उन्हें बड़ा झटका लगा, लेकिन अहमद भाई और ओमान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों के सहयोग ने उनका हौसला टूटने नहीं दिया।
एशिया कप 2025 का बड़ा मौका
आज समय श्रीवास्तव एशिया कप 2025 में ओमान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके लिए सबसे बड़ा रोमांच उस पल में है जब वह भारत के खिलाफ मैदान में उतरेंगे। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या और सूर्यकुमार यादव जैसे सितारों के सामने गेंदबाज़ी करने का ख्वाब उन्होंने कभी भारत की जर्सी पहनकर देखा था, लेकिन अब किस्मत ने उन्हें विरोधी टीम में खड़ा कर दिया है। वह खुद भी मानते हैं कि यह नियति का खेल है—अगर भारत के साथ खेलने का मौका नहीं मिला, तो उनके खिलाफ खेलने का ही सही।
सपनों की राह पर समय
समय श्रीवास्तव की कहानी हर उस खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है, जिसने कभी मैदान पर मेहनत की लेकिन मौके की कमी से हार मान ली। उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि नई राह खोजी और अब एशिया कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अपनी पहचान बनाने को तैयार हैं।
निष्कर्ष
भोपाल से शुरू हुआ यह सफर अब ओमान के लिए एशिया कप में खेलने तक पहुंच चुका है। समय श्रीवास्तव की जुझारू भावना और उनका विश्वास इस बात का प्रमाण है कि सपने कभी अधूरे नहीं रहते, बस रास्ते बदल जाते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि हार मान लेना आसान है, लेकिन मुश्किल राहों पर चलकर भी सपनों तक पहुंचा जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख क्रिकेट डॉट कॉम, ओमान क्रिकेट और आधिकारिक मीडिया रिपोर्ट्स (2025) पर आधारित है। यहां दी गई जानकारी केवल संदर्भ हेतु है। खिलाड़ी की उपलब्धियां और आधिकारिक आँकड़े संबंधित क्रिकेट बोर्ड व आधिकारिक रिकॉर्ड्स में ही प्रमाणित हैं। कृपया सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट या भ्रामक खबरों को तथ्य न मानें।
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