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Karwa Chauth 2025: प्यार, आस्था और चांद का पावन संगम — जानिए करवा चौथ की पूजा सामग्री, मुहूर्त और संपूर्ण विधि

On: October 9, 2025 8:17 PM
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Karwa Chauth 2025

Karwa Chauth 2025: करवा चौथ… यह सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है जो प्रेम, समर्पण और आस्था की मिसाल पेश करती है। हर साल की तरह इस बार भी देशभर की सुहागिनें अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत का पालन करेंगी। उत्तर भारत के राज्यों में इसे बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार करवा चौथ 2025 का पावन त्योहार शुक्रवार, 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस दिन के व्रत, पूजा सामग्री, शुभ मुहूर्त और पूरी पूजा विधि का भावपूर्ण विवरण।

करवा चौथ 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

ड्रिक पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर की रात 10:54 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर की शाम 7:38 बजे तक रहेगी। इस बार करवा चौथ की पूजा का सबसे शुभ समय प्रदोष काल के दौरान रहेगा, जो शाम 5:57 बजे से 7:11 बजे तक का है। यही समय पूजा करने और माता गौरी-चंद्रदेव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

करवा चौथ की पूजा की तैयारी और सामग्री

करवा चौथ की पूजा में माता चतुर्थी (चौथ माता) और भगवान शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन के लिए कई दिन पहले से तैयारी शुरू कर देती हैं। पूजा के लिए चौथ माता की तस्वीर, दीपक, अगरबत्ती, फूल, कुमकुम, सिंदूर, करवा (मिट्टी का घड़ा), छलनी, लाल कपड़ा, नव श्रृंगार के सामान जैसे चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, कंघी, साड़ी और अन्य सुहाग के प्रतीक आवश्यक माने जाते हैं।Karwa Chauth 2025
नैवेद्य में फलों, मिठाइयों और खीर का विशेष स्थान होता है, जिन्हें पूजा के बाद प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

सरगी का महत्व — व्रत की शुरुआत प्रेम से

करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से पहले सरगी खाने से आरंभ होता है। यह सरगी सास द्वारा बहू को प्रेमपूर्वक दी जाती है, जिसमें फलों, मिठाइयों और सूखे मेवों का समावेश होता है। यह न सिर्फ आहार है, बल्कि एक आशीर्वाद भी होता है, जो पूरे दिन की शक्ति और स्नेह का प्रतीक है।

करवा चौथ की पूजा विधि

शाम को महिलाएं सुंदर वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को सजाती हैं। माता गौरी और चौथ माता की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीया जलाया जाता है। पूजा के दौरान महिलाएं सामूहिक रूप से करवा चौथ कथा सुनती हैं, जो इस व्रत की आध्यात्मिक और पौराणिक महत्ता को दर्शाती है।

पूजा के बाद करवा में जल, दूध या सिक्के रखकर ब्राह्मण या किसी सुहागन स्त्री को दान किया जाता है। इसे “करक दान” कहा जाता है। यह दान सौभाग्य और समृद्धि की कामना के साथ किया जाता है।

चांद निकलने पर प्रेम का अमर क्षण

करवा चौथ की रात का सबसे प्रतीक्षित पल होता है चांद का दर्शन। जब आकाश में चांद उगता है, तो महिलाएं छलनी से पहले चांद और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर, पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का समापन करती हैं। यह क्षण पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास के उस बंधन को और मजबूत करता है जो जीवनभर साथ रहने का वादा है।Karwa Chauth 2025

करवा चौथ का भावार्थ — प्रेम और विश्वास का पर्व

करवा चौथ केवल परंपरा नहीं, बल्कि यह भारतीय नारी की शक्ति, त्याग और स्नेह का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि भावनाओं और विश्वास में बसता है। यही कारण है कि हर साल करोड़ों महिलाएं इस दिन पूरे मन से व्रत रखती हैं और चंद्रमा के सामने अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त करती हैं।

निष्कर्ष:

करवा चौथ 2025 का यह पर्व हर सुहागन के जीवन में नई ऊर्जा, प्रेम और सकारात्मकता लेकर आए। इस दिन का हर क्षण आस्था और अपनापन से भरा हो, यही कामना है।

डिस्क्लेमर:

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग की सामान्य जानकारी पर आधारित है। पाठक अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार विधि-विधान में बदलाव कर सकते हैं।

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Rishant Verma

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