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India and Afghanistan: के बीच नई शुरुआत जयशंकर ने किया काबुल में दूतावास खोलने का ऐतिहासिक ऐलान

On: October 10, 2025 9:29 PM
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India and Afghanistan

India and Afghanistan: नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को इतिहास रचने वाला पल देखने को मिला, जब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के काबुल में भारत के ‘टेक्निकल मिशन’ को अपग्रेड कर उसे पूर्ण रूप से भारतीय दूतावास का दर्जा देने की घोषणा की। यह फैसला न केवल भारत-अफगानिस्तान संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत है, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी है कि भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, स्थिरता और विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

नई दिल्ली में अहम बैठक, अफगान विदेश मंत्री से बातचीत

विदेश मंत्री जयशंकर ने यह घोषणा तालिबान प्रशासन के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी से मुलाकात के दौरान की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात उस वक्त हुई जब अफगानिस्तान के काबुल में कुछ घंटे पहले ही एक विस्फोट ने दहशत फैला दी थी। बातचीत के दौरान जयशंकर ने अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, “भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान करता है। दोनों देशों के बीच नजदीकी सहयोग न सिर्फ राष्ट्रीय विकास में मदद करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को भी मजबूत करेगा।”India and Afghanistan

शरणार्थियों और आतंकवाद पर साझा चिंता

जयशंकर ने इस मौके पर पाकिस्तान द्वारा अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी के मुद्दे पर चिंता जताई और कहा कि भारत इन शरणार्थियों के लिए आवास निर्माण और राहत सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और अफगानिस्तान दोनों को सीमा पार आतंकवाद जैसी साझा चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए दोनों को मिलकर इसका मुकाबला करना चाहिए।

अफगानिस्तान के लिए भारत का सहयोग

विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान के लिए छह नए स्वास्थ्य परियोजनाओं की भी घोषणा की। इनमें बीमारियों की जांच के लिए एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें, बीस एंबुलेंस और कैंसर की दवाएं शामिल होंगी। जयशंकर ने कहा कि भारत अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्सों में भूकंप प्रभावित इलाकों में घरों के पुनर्निर्माण और राहत कार्यों में भी सहयोग करेगा। साथ ही, उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत अफगान छात्रों, व्यापारियों और मरीजों के लिए वीज़ा प्रक्रिया को और आसान बनाएगा।

अफगानिस्तान में भारत की कूटनीतिक वापसी

यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने अपने सभी कूटनीतिक कर्मचारी और स्टाफ को अफगानिस्तान से वापस बुला लिया था। जून 2022 में भारत ने एक ‘टेक्निकल टीम’ को काबुल भेजा था ताकि मानवीय सहायता और परियोजनाओं की निगरानी जारी रखी जा सके। अब, लगभग तीन साल बाद, भारत का पूरा दूतावास फिर से काबुल में सक्रिय होने जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का संकेत है।India and Afghanistan

तालिबान सरकार के साथ बढ़ते रिश्ते

अमीर खान मुत्ताकी की यह भारत यात्रा भी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह तालिबान शासन के बाद उनकी पहली आधिकारिक नई दिल्ली यात्रा है। मुत्ताकी हाल ही में मॉस्को फॉर्मेट डायलॉग में शामिल होने के बाद दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने भारत और अफगानिस्तान के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

मानवता और विकास की साझी राह

भारत हमेशा से अफगानिस्तान के विकास में एक भरोसेमंद साथी रहा है — चाहे वह सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण हो या मानवीय सहायता की पहल। अब जब दोनों देश फिर से एक नए रिश्ते की नींव रख रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि भारत अफगानिस्तान को न सिर्फ एक पड़ोसी देश, बल्कि एक साझी विरासत और भविष्य का साथी मानता है।

Disclaimer:

इस लेख में दी गई जानकारी विश्वसनीय समाचार स्रोतों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक मत या विचार को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि भारत और अफगानिस्तान के बीच हाल के राजनयिक घटनाक्रम की सटीक और संतुलित जानकारी प्रदान करना है।

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Rishant Verma

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