Harshit Rana: भारतीय क्रिकेट में इस समय एक नाम सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है – हर्षित राणा। आने वाले ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए जब उनका नाम टीम इंडिया की लिमिटेड ओवर्स टीम में शामिल किया गया, तो क्रिकेट फैंस के बीच बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इस चयन का स्वागत किया तो कुछ ने इसे मोहम्मद शमी और वरुण चक्रवर्ती जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की अनदेखी बताया। लेकिन इस युवा तेज़ गेंदबाज़ के समर्थन में कई पूर्व क्रिकेटर्स सामने आए हैं, जो उनके चयन को पूरी तरह सही ठहरा रहे हैं।
आलोचनाओं के बीच भी राणा की स्ट्राइक रेट पर भरोसा
हाल ही में एशिया कप में हर्षित राणा ने दो मैचों में दो विकेट लिए थे और 42 गेंदों में 79 रन खर्च किए थे। हालांकि, श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने आखिरी ओवर में 11 रन बचाने की कोशिश की थी, जो मैच अंततः सुपर ओवर तक पहुंच गया था। इसके बावजूद कई विशेषज्ञों का मानना है कि राणा का चयन सिर्फ आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा और स्ट्राइक रेट के कारण हुआ है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर आनंद राजन, जो तेज़ गेंदबाज़ आवेश खान के कोच भी हैं, ने राणा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी ताकत लगातार विकेट लेने की क्षमता है। उन्होंने कहा, “राणा तेज़ रफ्तार पर गेंदबाज़ी करते हैं और स्ट्राइक रेट के मामले में बेहद प्रभावशाली हैं। टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में उन्हें करीब से देखा है और उनकी क्षमताओं को गहराई से समझा है। यही वजह है कि उन्हें चुना गया।”
ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में राणा का हथियार बनेगी रफ्तार
आनंद राजन ने आगे कहा कि जो लोग राणा की इकोनॉमी रेट पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें यह भी समझना चाहिए कि ऑस्ट्रेलिया जैसी पिचों पर तेज़ गेंदबाज़ी और स्ट्राइक रेट अधिक मायने रखता है। जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड मैनेजमेंट के बीच राणा जैसे पेसर टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
आंकड़ों पर नज़र डालें तो राणा का वनडे स्ट्राइक रेट 21.8 है, जबकि अर्शदीप सिंह का 26.6 है। वहीं टी20 में राणा का स्ट्राइक रेट 13.2 है, जो प्रसिध कृष्णा से भी बेहतर है। इसका मतलब है कि राणा विकेट लेने के लिए हर समय तैयार रहते हैं, भले ही रन थोड़े ज्यादा खर्च हों।
‘पैट कमिंस जैसी क्षमता’ – इशांत शर्मा के कोच की राय
भारत के अनुभवी गेंदबाज़ इशांत शर्मा के कोच आयुष अरोड़ा ने राणा की तुलना ऑस्ट्रेलियाई स्टार पैट कमिंस और भारत के महान गेंदबाज़ जावगल श्रीनाथ से की। उन्होंने कहा, “राणा की 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और बैक-ऑफ-लेंथ गेंदें उन्हें बेहद खतरनाक बनाती हैं। ऑस्ट्रेलिया की तेज़ पिचों पर यह उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकती है। उन्हें बस अपनी यॉर्कर और कंट्रोल पर और मेहनत करनी होगी।”
तकनीकी सुधार की जरूरत – पूर्व कोच का सुझाव
राजस्थान रॉयल्स के पूर्व गेंदबाज़ी कोच स्टेफन जोन्स ने भी राणा की प्रतिभा की सराहना की, लेकिन कुछ तकनीकी बिंदुओं पर सुधार की बात कही। उन्होंने कहा कि राणा की स्लोअर गेंदें बेहतरीन होती हैं और उनका एक्स-फैक्टर बल्लेबाज़ों को चौंका सकता है। हालांकि, उनका बैकफुट लोड थोड़ा ज़्यादा है जिससे गेंद कभी-कभी लेग साइड पर निकल जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर मौका मिले तो वे एनसीए में राणा के साथ काम कर इन तकनीकी खामियों को दूर करना चाहेंगे।
निचले क्रम में बल्लेबाज़ी का फायदा – कारसन घवरी की राय
पूर्व भारतीय क्रिकेटर कारसन घवरी ने कहा कि चयनकर्ता 2027 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए टीम तैयार कर रहे हैं। ऐसे में राणा जैसे खिलाड़ी, जो निचले क्रम में कुछ रन जोड़ सकते हैं, टीम के लिए बड़ी पूंजी साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “एक ओवर या एक मैच से किसी खिलाड़ी का मूल्यांकन नहीं होता। राणा के पास गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने की क्षमता है, जो टीम इंडिया के लिए आगे चलकर फायदेमंद होगी।”
राणा के चयन के पीछे गंभीर सोच
हर्षित राणा का चयन भले ही विवादों के घेरे में हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह चयन सोच-समझकर किया गया है। गौतम गंभीर जैसे कोच और चयनकर्ताओं ने उनके प्रदर्शन को करीब से देखा है और ऑस्ट्रेलियाई पिचों के लिहाज़ से उन्हें सही विकल्प माना है। युवा राणा के पास अब खुद को साबित करने का सुनहरा मौका है — और अगर उन्होंने इस मौके को भुनाया, तो वे भारत के भविष्य के स्टार पेसर बन सकते हैं।
डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई जानकारी समाचार स्रोतों और क्रिकेट विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक ताज़ा खेल घटनाओं और विश्लेषणों को पहुंचाना है। किसी भी खिलाड़ी या व्यक्ति के प्रति पक्षपात या नकारात्मक भावना प्रस्तुत करने का कोई इरादा नहीं है।






