Weather India Astrology Automobile Bihar Entertainment Events Technology Job Updates

Sanjiv Chaturvedi Case: 16 जजों के हटने के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बनाई नई पीठ, 30 अक्टूबर को होगी सुनवाई

On: October 20, 2025 7:50 PM
Follow Us:
Sanjiv Chaturvedi Case

Sanjiv Chaturvedi Case: देश के चर्चित ईमानदार अफसरों में से एक, भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से न्याय की राह पर चल रहे इस अधिकारी के केस में अब एक नया मोड़ आया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र ने खुद की अध्यक्षता में एक नई बेंच का गठन किया है, जो केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के खिलाफ संजीव चतुर्वेदी की अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगी।

16 जजों ने खुद को मामले से अलग किया

यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि अब तक कुल 16 न्यायाधीश खुद को संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामलों की सुनवाई से अलग कर चुके हैं। यह अपने आप में देश के न्यायिक इतिहास में एक अनोखा रिकॉर्ड बन गया है। इससे पहले, इतनी बड़ी संख्या में किसी एक व्यक्ति के मामलों से जजों ने खुद को अलग नहीं किया था।

नई डिवीजन बेंच में मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र के साथ न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय शामिल होंगे, जो 30 अक्टूबर को इस अवमानना याचिका की सुनवाई करेंगे। यह मामला सीएटी और उसके रजिस्ट्रार के सदस्यों के खिलाफ दायर किया गया है।Sanjiv Chaturvedi Case

कौन हैं संजीव चतुर्वेदी?

संजीव चतुर्वेदी भारतीय वन सेवा के 2002 बैच के अधिकारी हैं, जो अपनी ईमानदारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। हरियाणा कैडर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले चतुर्वेदी ने अवैध पेड़ कटाई, शिकार और वृक्षारोपण योजनाओं में वित्तीय गड़बड़ियों को उजागर कर सुर्खियां बटोरीं। राजनीतिक दबावों के बावजूद, उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपतियों प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी का समर्थन मिला, जिन्होंने उनके खिलाफ की गई कार्रवाईयों को रोका।

AIIMS में घोटालों का पर्दाफाश

चतुर्वेदी को देशभर में तब पहचान मिली जब उन्होंने दिल्ली के एम्स (AIIMS) में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के रूप में तैनाती के दौरान कई बड़े घोटालों का खुलासा किया। इस दौरान उन्होंने कई शक्तिशाली लोगों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए, जिसके बाद उन्हें कई बार तबादलों और प्रतिशोध का सामना करना पड़ा।

उत्तराखंड में सेवा और संघर्ष

बाद में संजीव चतुर्वेदी का कैडर बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया, जहां उन्होंने न सिर्फ वन संरक्षण पर काम किया, बल्कि हिमालयी जैव विविधता को बचाने के लिए कई नई पहलें कीं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करने का प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। इसी दौरान उन्होंने मसूरी वन प्रभाग में अतिक्रमण से जुड़े एक बड़े घोटाले का भी खुलासा किया।

‘16 जज’ — एक अनोखा रिकॉर्ड

संजीव चतुर्वेदी के मामलों से जुड़े 16 जजों का खुद को अलग करना अपने आप में एक अभूतपूर्व घटना है। इसमें उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रविंद्र मैठानी, राकेश थपलियाल, मनोज कुमार तिवारी जैसे जजों के साथ-साथ पूर्व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और यू.यू. ललित के नाम भी शामिल हैं।
चतुर्वेदी के अनुसार, यह किसी एक व्यक्ति के मामलों में अब तक का “देश का सबसे बड़ा न्यायिक रेकॉर्ड” है। इससे पहले केवल माफिया अतीक अहमद के मामले में 10 जजों ने खुद को सुनवाई से अलग किया था।Sanjiv Chaturvedi Case

अब उम्मीद है कि 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में इस लंबे समय से चल रहे विवाद पर कुछ ठोस प्रगति देखने को मिलेगी। संजीव चतुर्वेदी का कहना है कि उनका संघर्ष व्यक्तिगत नहीं बल्कि संस्थागत पारदर्शिता और ईमानदारी की रक्षा के लिए है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि तथ्यों पर आधारित जानकारी प्रस्तुत करना है।

DAP and Urea New Rates 2025: किसानों को मिली बड़ी राहत, अब सस्ती दरों पर मिलेगी खाद

UP News: यूपी में जमीन घोटाला प्रोफेसर के दो प्लॉट फर्जी दस्तावेज़ों से किसी और के नाम, उठे सब रजिस्ट्रार कार्यालय पर सवाल

News :नामीबिया की धरती पर बजा भारत का डंका: पीएम मोदी का भव्य स्वागत

rishant verma
Rishant Verma

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now