Govardhan Puja: दीपावली का पर्व बीत जाने के बाद भी उतरौला नगर और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दीपोत्सव की रौनक थमने का नाम नहीं ले रही। दीपावली के दूसरे दिन यानी गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव के मौके पर घरों के आंगन, मंदिरों और गलियों में दीपों की जगमगाहट ने पूरे वातावरण को पावन बना दिया। हर तरफ खुशियों और भक्ति का माहौल देखने को मिला।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव की छटा
दूसरे दिन नगर के मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की भव्य पूजा-अर्चना हुई। श्रद्धालुओं ने गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की और अपने आराध्य को अन्नकूट का प्रसाद अर्पित किया। महिलाओं ने पारंपरिक विधि से अन्नकूट का प्रसाद तैयार किया और उसे परिवारजनों तथा पड़ोसियों में प्रेमपूर्वक वितरित किया। इस दौरान मंदिरों में भक्ति संगीत और आरती की मधुर गूंज ने वातावरण को आध्यात्मिकता से भर दिया।
दीपों की जगमगाहट और खुशियों की बारिश
संध्या होते ही उतरौला नगर के साथ-साथ बदलपुर, रसूलाबाद, हुसैनाबाद, चाईडीह, डुमरिया और अन्य गांवों में दीपों की पंक्तियों ने मानो धरती पर तारों का संसार रच दिया। बच्चों और युवाओं ने पटाखों की आतिशबाजी से आसमान को रंगों से भर दिया, जबकि महिलाएं घरों की सजावट और पूजा-पाठ में व्यस्त रहीं। घर-घर से आती दीपों की लौ और फूलों की महक ने हर मन को उत्साह से भर दिया।
भाईचारे और एकता का संदेश
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पर्व केवल दीप जलाने या मिठाई बांटने का नहीं, बल्कि एकता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। दीपावली के बाद मनाया जाने वाला यह दीपोत्सव लोगों को जोड़ने का माध्यम बनता है, जहां हर चेहरा मुस्कुराता है और हर हृदय भक्ति से आलोकित हो उठता है।
दीपों की यह उजली परंपरा आने वाले दिनों में भी ऐसे ही समाज में प्रेम और एकता का प्रकाश फैलाती रहे, यही इस पर्व की सच्ची भावना है।
अस्वीकरण:
इस लेख में दी गई जानकारी स्थानीय घटनाओं और परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सांस्कृतिक जानकारी साझा करना है, किसी भी धार्मिक विश्वास या मान्यता को प्रभावित करना नहीं।
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