Satish Shah: जिंदगी का मंच जब भी हंसी और अदाकारी की बात करेगा, तो सतीश शाह का नाम हमेशा सुनाई देगा। ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ के इंद्रवदन साराभाई हों या ‘जाने भी दो यारों’ के अजीबोगरीब किरदार, उन्होंने हर दिल में अपनी जगह बना ली थी। लेकिन आज वह मुस्कुराहटें थम गईं, क्योंकि 25 अक्टूबर 2025 को सतीश शाह ने 74 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
अस्पताल ने की पुष्टि, किडनी फेलियर से हुआ निधन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सतीश शाह पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। शनिवार सुबह उन्हें अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उनके घर से मुंबई के पी.डी. हिंदुजा हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उन्हें उनके घर से आपातकालीन कॉल प्राप्त हुआ था। मेडिकल टीम तुरंत पहुंची और एम्बुलेंस में ही सीपीआर (CPR) शुरू किया गया। बावजूद इसके, डॉक्टरों की पूरी कोशिशों के बाद भी सतीश शाह को बचाया नहीं जा सका।
अस्पताल के बयान में लिखा गया — “हमें यह बताते हुए गहरा दुख हो रहा है कि सतीश शाह अब हमारे बीच नहीं रहे। वह भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के ऐसे कलाकार थे, जिनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। हम उनके परिवार, दोस्तों और चाहने वालों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।”
लंबे समय से चल रहा था इलाज, हुआ था किडनी ट्रांसप्लांट
‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ के निर्माता जे.डी. मजीठिया ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया कि सतीश शाह कुछ समय से बीमार थे और उन्होंने पहले किडनी ट्रांसप्लांट करवाया था। लेकिन बाद में उन्हें इंफेक्शन हो गया था, जिससे उनकी सेहत लगातार गिरती चली गई।
अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा की जानकारी
सतीश शाह के पार्थिव शरीर को 26 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक उनके निवास ‘गुरुकुल’, 14 कलानगर, बांद्रा (पूर्व), मातोश्री के पास अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, ताकि उनके चाहने वाले और मित्र उन्हें अंतिम विदाई दे सकें। इसके बाद दोपहर 12 बजे उनका अंतिम संस्कार पवन हंस श्मशान भूमि, वीले पार्ले (पश्चिम), मुंबई में किया जाएगा।
एक युग का अंत, लेकिन यादें अमर रहेंगी
सतीश शाह सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह हर घर का हिस्सा थे। उनके चेहरे की मुस्कान, उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवादों में छिपी सादगी ने भारतीय दर्शकों को हंसी के साथ-साथ जिंदगी को देखने का नया नजरिया दिया। ‘ये जो है जिंदगी’, ‘फिल्मी चक्कर’, ‘गोलमाल’ और ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ जैसे शोज़ और फिल्मों ने उन्हें भारतीय कॉमेडी का एक अमर चेहरा बना दिया।
उनका जाना भारतीय मनोरंजन जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। आज हर फैन के दिल में वही सवाल गूंज रहा है — “इंद्रवदन साराभाई, अब हमारी हंसी कौन लौटाएगा?” लेकिन शायद वहीं कहीं ऊपर, वह अब भी अपनी मुस्कान से किसी का दिन रोशन कर रहे होंगे।
डिस्क्लेमर:
इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। इसमें दी गई सभी जानकारियां विभिन्न मीडिया स्रोतों और आधिकारिक बयानों पर आधारित हैं। हम किसी भी प्रकार की अफवाह या असत्य जानकारी का समर्थन नहीं करते।
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