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Bihar Chunav 2025:तेजस्वी की एक बात और कांग्रेस के लिए खुला ‘सुनहरा रास्ता’? जानिए बिहार में क्या चल रहा है

On: July 26, 2025 7:51 AM
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BIhar Election

Bihar Chunav 2025 :बिहार की राजनीति कभी स्थिर नहीं रहती, यहां समीकरण हर दिन बदलते हैं। जहां एक तरफ नेता अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता हर सियासी हलचल को बारीकी से देखती है। इन दिनों एक ऐसा ही मामला बिहार की राजनीति को गर्माए हुए है – SIR विवाद और तेजस्वी यादव का चुनाव बहिष्कार का बयान। यह कोई साधारण बयान नहीं था, बल्कि इसने विपक्षी राजनीति की दिशा और दशा दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तेजस्वी यादव की इस बात ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है कि अगर आरजेडी चुनाव से हटती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा किसे होगा? जवाब साफ है – कांग्रेस। जो पार्टी लंबे समय से बिहार में अपनी खोई हुई ज़मीन की तलाश में भटक रही थी, उसके सामने यह एक ऐसा मौका हो सकता है जो उसे फिर से सियासी नक्शे पर मज़बूती से खड़ा कर दे।BIhar Election

क्या RJD के हटते ही कांग्रेस को मिलेगा नया जीवन?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर RJD वाकई किसी भी बड़े चुनाव का बहिष्कार करती है, तो कांग्रेस उस खाली जगह को भरने की पूरी कोशिश करेगी। कांग्रेस पार्टी खुद को महागठबंधन में एक वैकल्पिक ताकत के रूप में देखना चाहती है और यह मौका उसके लिए एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकता है। पार्टी के पास अल्पसंख्यक, दलित, महिला और युवा मतदाताओं का एक ऐसा वर्ग है जो परंपरागत रूप से RJD से जुड़ा रहा है, लेकिन विकल्प की तलाश में भी है। ऐसे में कांग्रेस इन वर्गों को जोड़ने का हरसंभव प्रयास कर सकती है।

क्या कांग्रेस तैयार है इस मौके को भुनाने के लिए?

हालांकि कांग्रेस के लिए यह सुनहरा मौका है, लेकिन राह इतनी आसान नहीं है। पार्टी का जमीनी संगठन अब भी कमज़ोर है, स्थानीय नेतृत्व में मतभेद हैं और चुनावी तैयारियों में कई स्तरों पर कमी दिखती है। मगर यही वह क्षण है जब कांग्रेस को अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने बिहार पर विशेष फोकस करना शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के संभावित दौरों की चर्चा भी हो रही है, और पार्टी के संगठनात्मक नेता जैसे केसी वेणुगोपाल व कृष्णा अलावरू को सक्रिय किया गया है।

भाजपा को भी मिल सकती है राहत

RJD के चुनाव से हटने की स्थिति भाजपा के लिए भी राहतभरी हो सकती है, क्योंकि विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा अचानक गायब हो जाएगा। ऐसे में उसे कांग्रेस जैसी अपेक्षाकृत कमजोर पार्टी से सीधी लड़ाई लड़नी होगी। लेकिन अगर कांग्रेस इस मौके को भुनाने में कामयाब हो गई, तो भविष्य में बीजेपी के सामने एक नया विपक्ष खड़ा हो सकता है – जो शायद पहले से ज़्यादा संगठित और मजबूत हो।

बिहार की राजनीति में एक नई करवट?

बिहार हमेशा से सियासी प्रयोगों की ज़मीन रहा है। यहां गठबंधन बनते हैं, टूटते हैं, नेता बदलते हैं और विचारधाराएं टकराती हैं। अगर RJD चुनाव बहिष्कार जैसा बड़ा कदम उठाती है, तो यह एक ऐतिहासिक मोड़ होगा। कांग्रेस के पास यह मौका है कि वह सिर्फ एक राजनीतिक विकल्प न बने, बल्कि राज्य में एक प्रभावशाली ताकत के रूप में उभरे।BIhar Election

यह समय है जब कांग्रेस को नारे नहीं, काम और जमीनी सच्चाई पर ध्यान देना होगा। तेजस्वी यादव का यह बयान सिर्फ बहिष्कार का इशारा नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव का संकेत है।

तेजस्वी की एक बात और कांग्रेस के लिए खुला ‘सुनहरा रास्ता’? जानिए बिहार में क्या चल रहा है!डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषणों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार किसी राजनीतिक पार्टी के समर्थन या विरोध में नहीं हैं। पाठक कृपया किसी भी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले स्वतंत्र रूप से जानकारी की पुष्टि करें।

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Rishant Verma

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