Bihar Election 2025: बिहार की सियासत एक बार फिर गरमाती दिख रही है। विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई हो, लेकिन महागठबंधन और एनडीए के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर असमंजस अब भी बरकरार है। दूसरी ओर, कांग्रेस की ऊँची मांगों ने इस पूरी प्रक्रिया को और पेचीदा बना दिया है। इस बीच, आरजेडी बिहार अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल का एक बड़ा बयान सामने आया है जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
सीट बंटवारे पर अटका महागठबंधन, कांग्रेस पर निशाना
मंगनी लाल मंडल ने साफ कहा कि सहयोगी दलों की सीटों की मांग ज़रूरत से ज़्यादा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरजेडी बिहार विधानसभा चुनावों में वही सीट शेयरिंग फॉर्मूला अपनाना चाहती है जो 2024 लोकसभा चुनावों में महागठबंधन के तहत तय हुआ था। उन्होंने कहा, “हमने वह फॉर्मूला अपने सहयोगियों को भेज दिया है। अब उसी आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।”
मंडल ने यह भी बताया कि अगले 48 घंटों में सीट बंटवारे पर औपचारिक घोषणा की जाएगी। साथ ही आरजेडी ने अपने उम्मीदवारों को निर्देश दिया है कि जिन सीटों पर कोई विवाद नहीं है, वहां वे तुरंत नामांकन दाखिल करें। उन्होंने कहा कि इसमें कोई गलत बात नहीं है, क्योंकि आगे चलकर संयुक्त रूप से उम्मीदवारों की घोषणा की जाएगी।
“तेजस्वी ही रहेंगे चेहरा, कांग्रेस की वजह से छूटी सरकार”
मंगनी लाल मंडल ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर दोबारा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी 2020 में भी महागठबंधन के सीएम फेस थे और इस बार भी वही चेहरा रहेंगे। कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “2020 में हमने कांग्रेस को 70 सीटें दी थीं, लेकिन उन्होंने 51 सीटें हार दीं। उसी वजह से हमारी सरकार नहीं बन पाई और तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नहीं बन सके।”
उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि आरजेडी अब सीट बंटवारे में किसी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है। उन्होंने सहयोगी दलों को सलाह दी कि वे अपनी ज़मीनी ताकत देखकर ही सीटों की मांग करें, सिर्फ उम्मीद के सहारे नहीं।
“महागठबंधन में नहीं होगी इन नेताओं की जगह”
मंगनी लाल मंडल ने एक और बड़ा बयान देते हुए कहा कि महागठबंधन में अब चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों के पास एक-एक सीट के लिए कई उम्मीदवार हैं, जिससे सीट बंटवारे की प्रक्रिया और जटिल होती जा रही है।
चुनावी संग्राम की दस्तक
बिहार में चुनावी जंग की दस्तक हो चुकी है। उम्मीदवार तैयार हैं, प्रचार की रणनीतियां बन रही हैं, लेकिन महागठबंधन के भीतर की तकरार ने साफ कर दिया है कि आगे का रास्ता आसान नहीं होगा। अगर सीट शेयरिंग पर सहमति जल्द नहीं बनी, तो यह मतभेद चुनावी परिणामों पर भी असर डाल सकता है।
Disclaimer:
इस लेख का उद्देश्य केवल राजनीतिक घटनाक्रम की जानकारी देना है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित दलों या नेताओं के बयानों पर आधारित हैं। पाठक इससे किसी प्रकार की राजनीतिक राय न बनाएं।
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