CRPF: झारखंड के खूबसूरत लेकिन खतरनाक सरांडा जंगल एक बार फिर गोलियों और धमाकों की गूंज से हिल उठे। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे माओवादियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर आईईडी ब्लास्ट किया, जिसमें सीआरपीएफ की 209 कोबरा बटालियन के दो जवान घायल हो गए। घटना हिण्डूकोचा गांव के पास जाराइकेला थाना क्षेत्र में उस समय हुई, जब राज्य पुलिस और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम सर्च ऑपरेशन चला रही थी।
घायल जवानों को एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया
घायल जवानों की पहचान राम प्रवेश सिंह और छोटू कश्यप के रूप में हुई है। दोनों को तुरंत बेहतर इलाज के लिए हेलिकॉप्टर से रांची एयरलिफ्ट किया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया गया है। झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की टीमें मिलकर घने जंगलों में माओवादियों की तलाश में जुटी हैं।
जंगल में बिछे हैं मौत के जाल
पुलिस के अनुसार, माओवादियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से जंगल में कई जगह आईईडी बिछा रखी है। सरांडा के घने जंगलों में यह कोई नई रणनीति नहीं है, लेकिन हर बार यह खतरा जवानों के लिए बड़ा चुनौती बनकर सामने आता है।
हाल के हमलों ने बढ़ाई चिंता
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में माओवादियों ने रेलवे ट्रैक को भी निशाना बनाया था। 2 अगस्त की रात, करमपाड़ा और रेंगदा रेलवे साइडिंग के बीच पटरी को विस्फोट से उड़ा दिया गया था, जिससे एक बड़ी रेल दुर्घटना टल गई। वहीं 3 जुलाई को ओडिशा-झारखंड बॉर्डर के पास विमलगढ़ स्टेशन के नजदीक एक आईईडी धमाके में एक गैंगमैन की मौत हो गई थी और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हुआ था।
सरांडा जंगल में अब भी छिपे हैं माओवादी
फिलहाल माओवादी सरांडा जंगल के कुछ हिस्सों में सिमट गए हैं, लेकिन यहां उनका असर अभी भी बरकरार है। अनुमान है कि करीब 85–90 माओवादी इस क्षेत्र में छिपे हुए हैं और उन्होंने हजारों आईईडी लगा रखी हैं, जिससे सुरक्षा बलों के लिए यह इलाका बेहद खतरनाक बना हुआ है। नवंबर 2022 से ही पुलिस और सीआरपीएफ इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अभियान चला रही है, ताकि मिसिर बेसरा और पतीराम माझी उर्फ अनल दा जैसे बड़े माओवादी नेताओं को पकड़ा जा सके।
सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
सरांडा जंगल सिर्फ एक भूगोल नहीं, बल्कि झारखंड की सुरक्षा चुनौती का सबसे कठिन चेहरा है, जहां हर कदम पर मौत का खतरा मंडराता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल समाचार जानकारी साझा करना है। इसमें वर्णित घटनाएं और आंकड़े आधिकारिक रिपोर्ट्स और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित हैं।
India Russia Trade :भारत की तेल नीति पर ट्रंप की आंखें तनीं, लेकिन जवाब में मिला सख्त तेवर!






