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Devuthani Ekadashi 2025 Muhurat: जब भगवान विष्णु जागेंगे योगनिद्रा से, शुरू होंगे शुभ कार्य और तुलसी विवाह का पावन पर्व

On: November 1, 2025 10:06 AM
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Devuthani Ekadashi 2025 Muhurat

Devuthani Ekadashi 2025 Muhurat: हिंदू धर्म की परंपराओं में देवउठनी एकादशी का दिन बेहद पवित्र और मंगलकारी माना जाता है। यह वह क्षण होता है जब सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और धरती पर फिर से शुभता और सौभाग्य की लहर दौड़ जाती है। लोग मानते हैं कि जब भगवान विष्णु जागते हैं, तो उनके साथ ही संसार की सभी शुभ शक्तियाँ सक्रिय हो जाती हैं। विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत या नया वाहन खरीदना — ऐसे सभी शुभ कार्य इसी दिन से शुरू किए जाते हैं।

देवउठनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

देवउठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु का जागरण होता है, जिससे चार महीने तक चला चातुर्मास समाप्त होता है। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और इस समय विवाह या अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते।

लेकिन देवउठनी एकादशी के दिन से यह प्रतिबंध समाप्त हो जाता है और घर-आंगन में फिर से शहनाई की ध्वनि गूंजने लगती है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा करते हैं, जिससे जीवन में पापों का नाश होता है और सुख-शांति का आगमन होता है।

2025 में कब है देवउठनी एकादशी? जानें तिथि और समय

वर्ष 2025 में देवउठनी एकादशी का पर्व 1 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन एकादशी की तिथि सुबह 9:11 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 2 नवंबर की सुबह 7:31 बजे तक रहेगी। व्रत पारण (व्रत तोड़ने) का समय 2 नवंबर को सुबह 7:31 बजे के बाद का रहेगा।

इसी दिन के अगले दिन, यानी 2 नवंबर को तुलसी विवाह का शुभ पर्व भी मनाया जाएगा। यह दिव्य संयोग बेहद दुर्लभ है क्योंकि तुलसी विवाह को चातुर्मास के अंत और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।Devuthani Ekadashi 2025 Muhurat

तुलसी विवाह का धार्मिक और भावनात्मक महत्व

तुलसी विवाह का आयोजन हर साल देवउठनी एकादशी के अगले दिन किया जाता है। इस दिन तुलसी माता, जिन्हें देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है, का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप से होता है। यह विवाह न केवल धार्मिक दृष्टि से पवित्र होता है बल्कि परिवार में प्रेम, एकता, समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक भी है।

कहा जाता है कि तुलसी विवाह का आयोजन करने से परिवार में कभी दरिद्रता नहीं आती और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। तुलसी और विष्णु के इस दिव्य मिलन से संसार में शुभता का संचार होता है और भक्तों के जीवन में सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं।

देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह 2025 की मुख्य तिथियाँ एक नजर में

विषय जानकारी
देवउठनी एकादशी तिथि 1 नवंबर 2025 (सुबह 9:11 बजे से प्रारंभ)
एकादशी समाप्ति 2 नवंबर 2025 (सुबह 7:31 बजे तक)
व्रत पारण समय 2 नवंबर 2025 (सुबह 7:31 बजे के बाद)
तुलसी विवाह तिथि 2 नवंबर 2025
देवउठनी एकादशी महत्व भगवान विष्णु का जागरण, चातुर्मास का समापन
शुभ कार्यों की शुरुआत विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय आदि
पारंपरिक पूजा सामग्री तुलसी पत्ते, पंचामृत, दीपक, पुष्प, फल, मिष्ठान
व्रत का धार्मिक लाभ पापों से मुक्ति, मोक्ष और समृद्धि की प्राप्ति

 

पूजा-व्रत से मिलता है मोक्ष और सुख-समृद्धि

देवउठनी एकादशी के दिन भक्त प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। घर में तुलसी के पौधे को सजाया जाता है, दीप जलाया जाता है और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। भक्त पूरे दिन व्रत रखकर भजन, कीर्तन और कथा सुनते हैं।

रात्रि में भगवान विष्णु के जागरण की पूजा विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन यदि कोई सच्चे मन से उपवास रखता है और भगवान विष्णु का ध्यान करता है, तो उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे जीवन में वैकुंठ प्राप्ति का मार्ग मिलता है।

देवउठनी एकादशी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएँ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में जाते हैं, तो देवता और मनुष्य दोनों उनके आशीर्वाद से वंचित हो जाते हैं। इसीलिए जब वे जागते हैं, तो पूरे ब्रह्मांड में आनंद और उल्लास का माहौल बन जाता है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है और भगवान विष्णु तथा तुलसी माता की आराधना करता है, उसे जीवन में सभी प्रकार की सिद्धियाँ, सुख और सफलता प्राप्त होती है।

निष्कर्ष: जब देव जागते हैं, तब जगती है शुभता

देवउठनी एकादशी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह आशा, जागरण और पुनर्जन्म का प्रतीक है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि हर ठहराव के बाद नई शुरुआत जरूर होती है। जब भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं, तो उनके साथ ही हमारे जीवन की नई रोशनी भी जगमगा उठती है।Devuthani Ekadashi 2025 Muhurat

इस वर्ष जब 1 नवंबर की सुबह भगवान विष्णु का जागरण होगा, तब हर भक्त के हृदय में भक्ति और उत्साह की लौ जल उठेगी — क्योंकि यह दिन सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि शुभता के पुनरागमन का प्रतीक है।

अस्वीकरण:

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसमें दी गई तिथियाँ और मुहूर्त ज्योतिषीय गणना के अनुसार हैं, जो क्षेत्र विशेष के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकते हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से परामर्श अवश्य करें।

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Rishant Verma

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