Ek Deewane Ki Deewaniyat Review: आज के दौर में जहां लव स्टोरीज़ अक्सर इमोशन और ऑब्सेशन के बीच झूलती नज़र आती हैं, वहीं Ek Deewane Ki Deewaniyat (EDKD) पुरानी 90 के दशक की रोमांटिक फिल्मों की याद दिलाती है। डायरेक्टर मिलाप मिलन झवेरी और लेखक मुश्ताक शेख ने मिलकर एक ऐसी कहानी गढ़ी है जो उतनी ही नाटकीय है जितनी भावनाओं से भरी, लेकिन कभी-कभी अपने ही घिसे-पिटे ढर्रे में उलझ जाती है।
कहानी: प्यार जो जुनून बन गया
फिल्म की कहानी विक्रम आदित्य भोसलें (हर्षवर्धन राणे) और अदा़ रंधावा (सोनम बाजवा) के बीच पनपे उस प्यार की है जो धीरे-धीरे दीवानगी की हद तक पहुंच जाता है। विक्रम एक तेज़-तर्रार युवा नेता है जो मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में है। लेकिन जब उसकी नज़र अदा़, एक सुपरस्टार एक्ट्रेस, पर पड़ती है, तो उसकी दुनिया ही बदल जाती है। जो आकर्षण था, वो जल्द ही पागलपन बन जाता है। अदा़ के इंकार के बावजूद विक्रम का जुनून थमता नहीं। सवाल यही है—क्या अदा़ कभी पिघलेगी, या यह प्रेम शुरू से ही बर्बादी की राह पर था?
अभिनय और निर्देशन की बात
फिल्म की शुरुआत में मुंबई की चमक और 90s वाले रोमांस का पुराना स्वाद देखने को मिलता है। हालांकि कहानी जल्द ही पुराने बॉलीवुड ट्रॉप्स में फंस जाती है। पहली हाफ में फिल्म थोड़ी सुस्त और खिंची हुई लगती है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी रफ्तार पकड़ती है, खासकर अदा़ के रैली सीन के दौरान। डायरेक्टर झवेरी ने कुछ ऐसे सीन रचे हैं जो पुराने जमाने की सच्ची मोहब्बत का एहसास दिलाते हैं, भले ही उनमें आधुनिक टच की कमी महसूस होती है।
हर्षवर्धन राणे अपने किरदार में पूरी तरह डूबे नज़र आते हैं। उनका गुस्सा, दर्द और टूटन—सब कुछ परदे पर सजीव लगता है। उनकी आंखों की तीव्रता और संवेदनशीलता उन्हें एक ऐसा हीरो बनाती है जो प्यार और पागलपन की सीमा पर खड़ा है। सोनम बाजवा ने अदा़ के किरदार को बेहद खूबसूरती से निभाया है। उनकी आंखों में जो भावनाएं हैं, वो शब्दों से कहीं ज़्यादा गहराई से कहानी कह जाती हैं। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री देखने लायक है—कभी सुलगती हुई, तो कभी टूटती हुई।
संगीत और संवादों का असर
फिल्म के संवाद पुराने बॉलीवुड की याद दिलाते हैं, जैसे—“अगर ज़मीर सोने न दे, तो बैंक में नींद खरीदने का बैलेंस होना चाहिए।” हालांकि ये लाइनें गहराई लिए हुए हैं, लेकिन हर बार दिल तक नहीं पहुंच पातीं। फिल्म का असली जादू इसके संगीत में बसता है। विशाल मिश्रा, कौशिक-गुड्डू और कुनाल वर्मा की धुनें फिल्म को भावनात्मक ऊंचाई देती हैं। टाइटल ट्रैक “दीवानियत” और सोनम का ग्लैमरस डांस नंबर “दिल दिल दिल” पहले से ही दर्शकों की जुबान पर चढ़ चुके हैं।
नतीजा: पुराने प्यार की नई गूंज
Ek Deewane Ki Deewaniyat उन दर्शकों के लिए है जो अब भी प्यार को उसकी सबसे गहरी और दर्दभरी शक्ल में देखना पसंद करते हैं। यह फिल्म नई कहानी तो नहीं कहती, लेकिन पुरानी मोहब्बत की खुशबू ज़रूर जगाती है। इसमें वो नॉस्टेल्जिया है जो दिल के किसी कोने में बीते जमाने की यादें ताज़ा कर देता है। हालांकि यह फिल्म हर दर्शक के लिए नहीं, लेकिन जो लोग जुनूनी रोमांस और पुराने दौर की भावनात्मक कहानियों के प्रशंसक हैं, उनके लिए यह एक बार ज़रूर देखने लायक है।
अस्वीकरण:
इस लेख में दी गई समीक्षा लेखक के व्यक्तिगत विचारों पर आधारित है। फिल्म का अनुभव व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर कर सकता है। इस लेख का उद्देश्य केवल सिनेमाई जानकारी और विश्लेषण प्रस्तुत करना है, किसी भी व्यक्ति या संस्था को आहत करने का नहीं।
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