H1B Visa: विदेश में काम करने का सपना देखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए अमेरिकी प्रशासन की हालिया घोषणा ने एक नया तनाव पैदा कर दिया है। पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने H-1B वीज़ा फीस में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की घोषणा की। नए नियमों के तहत कंपनियों को हर विदेशी कर्मचारी के लिए सालाना 1 लाख अमेरिकी डॉलर शुल्क चुकाना होगा। यह कदम न केवल कंपनियों के लिए बल्कि भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि भारतीय सबसे बड़े लाभार्थी समूह में आते हैं।
नई फीस और उसका प्रभाव
वर्तमान H-1B प्रोसेसिंग लागत कुछ हजार डॉलर ही होती थी, लेकिन अब यह शुल्क कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ डाल देगा। प्रशासन अभी यह तय कर रहा है कि यह शुल्क एक साथ लिया जाएगा या सालाना। हालांकि व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि नई फीस केवल नए वीज़ा आवेदन पर लागू होगी और वर्तमान होल्डर्स को इससे प्रभावित नहीं किया जाएगा।
लेकिन इस घोषणा और उसके बाद की स्पष्टीकरण के बीच, विदेश में H-1B होल्डर्स में घबराहट फैल गई। कई कंपनियों ने अपने विदेशी कर्मचारियों को तुरंत अमेरिका लौटने की सलाह दी, ताकि वे नई फीस से बच सकें।
टिकट बुकिंग में ऑनलाइन हमले
अम्रुता तमानम, ऑस्टिन, टेक्सास की सॉफ़्टवेयर इंजीनियर, छुट्टियों में विजयवाड़ा गई थीं। जैसे ही नई फीस की खबर आई, उन्होंने तुरंत अमेरिका लौटने की कोशिश की। लेकिन ऑनलाइन ट्रोल्स ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया। 4chan नामक राइट-विंग फोरम पर एक अभियान चलाया गया, जिसे “Clog the Toilet” कहा गया, जिसमें भारतीय H-1B धारकों की फ्लाइट बुकिंग को ब्लॉक करने की कोशिश की गई।
इन ट्रोल्स ने एयरलाइन की बुकिंग साइट्स पर कई सीटें ब्लॉक कर दीं, जिससे टिकटें मिलना मुश्किल हो गया। अम्रुता को अंततः $2,000 खर्च करके कतर एयरवेज से एकतरफा टिकट मिल सकी, जो उनके मूल राउंड-ट्रिप किराए से दोगुनी थी।
ऑनलाइन घृणा और उसके खतरे
इस तरह की ऑनलाइन गतिविधि केवल असुविधा ही नहीं बल्कि मानसिक तनाव भी पैदा करती है। Global Project Against Hate and Extremism की सह-संस्थापक Heidi Beirich ने AFP को बताया कि 4chan जैसी साइट्स लोगों को उग्रवादी विचारों की ओर ले जा सकती हैं। इसी तरह के ऑनलाइन ट्रोलिंग से न केवल H-1B होल्डर्स प्रभावित हुए, बल्कि यह दिखाता है कि डिजिटल दुनिया में कितनी आसानी से परेशान करने वाले अभियान चलाए जा सकते हैं।
H-1B वीज़ा प्रोग्राम और भारतीय पेशेवर
H-1B वीज़ा प्रोग्राम अमेरिकी कंपनियों को तीन साल के लिए विदेशी विशेषज्ञ कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुमति देता है, जिसे छह साल तक बढ़ाया जा सकता है। सालाना 85,000 H-1B वीज़ा जारी किए जाते हैं, जिनमें लगभग तीन-चौथाई भारतीय होते हैं। यह भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए अमेरिका में करियर बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
लेकिन नई फीस और ऑनलाइन ट्रोलिंग की घटनाओं ने इस अवसर को अस्थिर और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। डिजिटल युग में, केवल एक कीबोर्ड की स्ट्रोक से व्यापक प्रभाव डाला जा सकता है और यह भारतीय पेशेवरों की सुरक्षा और मानसिक शांति के लिए चिंता का विषय बन गया है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। H-1B वीज़ा नियमों और शुल्क में बदलाव के लिए केवल अमेरिकी प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट को संदर्भ माना जाना चाहिए।
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