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I Love Muhammad: कानपुर बोर्ड विवाद दरगाह आला हजरत ने एफआईआर पर जताई नाराज़गी

On: September 18, 2025 7:08 PM
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I Love Muhammad: कानपुर की गलियों में बीते दिनों उठी हलचल ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान ट्रैक्टर पर लगाए गए “आई लव मोहम्मद” बोर्ड ने दो समुदायों को आमने-सामने ला खड़ा किया। इसी घटना पर कानपुर पुलिस ने 25 मुस्लिम युवकों पर एफआईआर दर्ज कर दी। लेकिन इस पूरे मामले ने अब और तूल पकड़ लिया है, क्योंकि बरेली स्थित मशहूर दरगाह आला हजरत ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है।

दरगाह आला हजरत का बयान

दरगाह से जुड़े संगठन जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान ने युवाओं पर हुई कार्रवाई को पूरी तरह असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद से प्रेम जताने के लिए लगाए गए बोर्ड को अपराध नहीं माना जा सकता। यह न सिर्फ धार्मिक आस्था का हिस्सा है बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत भी आता है।I Love Muhammad

संवैधानिक अधिकारों का हवाला

फरमान मियां ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19-1-ए), धर्म पालन की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं पर दर्ज मुकदमों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मेना‍का गांधी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने धार्मिक प्रेम और आस्था को व्यक्त करने से नहीं रोका जा सकता।

विवाद का पृष्ठभूमि

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कानपुर के सैय्यद नगर में रामनवमी शोभायात्रा गेट के सामने ट्रैक्टर पर “आई लव मोहम्मद” का बोर्ड लगाया गया। इस पर हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई और बोर्ड हटाने की मांग पर अड़ गए। मौके पर पहुंचे एसीपी रंजीत कुमार ने स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन मामला इतना बढ़ा कि एफआईआर तक पहुंच गया।I Love Muhammad

दरगाह की अपील

दरगाह आला हजरत ने साफ कहा है कि धार्मिक प्रेम और आस्था को व्यक्त करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसे अपराध की तरह देखना लोकतंत्र की आत्मा के साथ अन्याय है। दरगाह ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि ऐसे मामलों को न सिर्फ संवेदनशीलता से सुलझाया जाए, बल्कि युवाओं पर दर्ज मुकदमों को भी वापस लिया जाए।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और संबंधित संगठनों के बयानों पर आधारित है। किसी भी घटना की अंतिम पुष्टि प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मान्य होगी।

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Rishant Verma

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