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Manipur: मणिपुर दौरे पर पीएम मोदी हिंसा की आग में शांति का संदेश और नए सवेरे की आस

On: September 13, 2025 7:40 PM
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Manipur: देश का उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर पिछले दो सालों से दर्द और तनाव से जूझ रहा है। मई 2023 में जब मैतेई बहुल समुदाय और मुख्य रूप से ईसाई कुकी समुदाय के बीच हिंसा भड़की, तब से यहां की फिज़ा खून और आंसुओं से सराबोर रही है। इसी हिंसा में अब तक 260 से ज़्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई और हज़ारों परिवार उजड़कर अस्थायी कैंपों में रहने को मजबूर हैं।

मणिपुर में पीएम मोदी की पहली मौजूदगी

13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार मणिपुर पहुंचे और चुराचांदपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। यह इलाका कुकी समुदाय का गढ़ माना जाता है। पीएम मोदी ने यहां लोगों से सीधी बातचीत करते हुए कहा कि, “जीवन को फिर पटरी पर लाने के लिए भारत सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मैं आपसे वादा करता हूं कि इस कठिन घड़ी में पूरा देश आपके साथ खड़ा है।”Manipur

शांति की राह पर चलने की अपील

मोदी ने अपने संबोधन में सभी समूहों से हिंसा छोड़कर शांति की राह पकड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सपनों को पूरा करने का रास्ता केवल शांति से होकर गुजरता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने इम्फाल, जो मैतेई समुदाय का प्रमुख इलाका है, में भी एक रैली को संबोधित करने का कार्यक्रम तय किया।

मणिपुर की राजनीति और जमीनी हकीकत

करीब 30 लाख की आबादी वाले इस राज्य में ज़मीन और सरकारी नौकरियों को लेकर लंबे समय से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच खींचतान रही है। राजनीतिक दलों पर आरोप है कि उन्होंने अपने फायदे के लिए इस विभाजन को और गहरा किया। फरवरी 2025 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने हिंसा पर काबू न पाने के आरोपों के बीच इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद से मणिपुर सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में है।

दौरे का बड़ा मकसद

मोदी का यह दौरा न सिर्फ मणिपुर बल्कि असम और बिहार जैसे अहम राज्यों को भी जोड़ता है। बिहार, जहां इस साल के अंत में चुनाव होने हैं, में पीएम मोदी आठ अरब डॉलर की परियोजनाओं की घोषणा करने वाले हैं। इनमें रेलवे, सड़क, कृषि और एयरपोर्ट टर्मिनल जैसी योजनाएं शामिल हैं।Manipur

उम्मीदों की नई शुरुआत

मणिपुर में मोदी की मौजूदगी ने एक नई उम्मीद जगाई है। हिंसा से टूटे दिलों में अब यह सवाल गूंज रहा है कि क्या वाकई राज्य में शांति और विकास लौट पाएगा। हालांकि घाव गहरे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के संदेश ने यह भरोसा दिलाया है कि मणिपुर का संघर्ष भुलाया नहीं गया है और उसके दर्द में पूरा देश उसके साथ खड़ा है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी समाचार स्रोतों और उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों तक जानकारी पहुँचाना है। किसी भी प्रकार की राजनीतिक राय या व्यक्तिगत दृष्टिकोण प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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Rishant Verma

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