NPS: क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी रिटायरमेंट की कमाई पर फैसला पूरी तरह से आपके हाथ में हो? अब यह सपना हकीकत बनने जा रहा है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में बड़ा बदलाव किया है, जिससे निवेशकों को पहले से कहीं ज्यादा आज़ादी मिलने वाली है।
इक्विटी में मिलेगा 100% निवेश का विकल्प
पहले तक एनपीएस में निवेशक अपनी पूरी पेंशन राशि का केवल 75% हिस्सा ही इक्विटी से जुड़ी योजनाओं में लगा सकते थे। लेकिन 1 अक्टूबर 2025 से यह सीमा खत्म हो जाएगी। अब गैर-सरकारी एनपीएस ग्राहकों को यह अधिकार होगा कि वे चाहें तो पूरी पेंशन राशि इक्विटी में निवेश करें। इसका मकसद है कि लोग अपनी उम्र, ज़रूरत और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार बेहतर ढंग से अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स की योजना बना सकें।
एक से ज्यादा स्कीम में निवेश की आज़ादी
अब तक निवेशकों को केवल एक ही स्कीम चुननी होती थी, चाहे वह ऑटोचॉइस हो या एक्टिवचॉइस। लेकिन अब एमएसपी (मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क) की शुरुआत के साथ निवेशक अपनी पेंशन राशि अलग-अलग योजनाओं में बांट सकेंगे। यानी कोई युवा निवेशक पूरी राशि शेयर बाजार से जुड़े फंड्स में डाल सकता है, जबकि कम जोखिम उठाना चाहने वाले निवेशक अपने पैसे का बड़ा हिस्सा डेट फंड्स या बैलेंस्ड फंड्स में लगाकर सुरक्षित रह सकते हैं।
उम्र के साथ निवेश की नई आज़ादी
पहले एनपीएस में निवेश की उम्र सीमा 60 साल तक ही थी। यानी 60 साल तक ही पैसा जमा कराया जा सकता था। लेकिन अब यह नियम भी बदल दिया गया है। निवेशक चाहे तो 50 या 55 साल की उम्र में ही अपनी राशि निकाल सकते हैं। वहीं, जो लोग आगे निवेश करना चाहते हैं, वे 60 से 75 साल की उम्र तक भी जमा कर सकते हैं। यह बदलाव खासकर प्रोफेशनल्स, सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
सुरक्षा और पारदर्शिता बरकरार
इन बदलावों के बावजूद सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। एनपीएस निवेशकों को उनकी कमाई और जोखिम से जुड़ी पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही पेंशन खाता पोर्टेबल रहेगा, यानी इसे किसी भी पेंशन फंड मैनेजर के पास ट्रांसफर किया जा सकेगा। हालांकि, यह नियम पहले की तरह लागू रहेगा कि रिटायरमेंट के समय कुल राशि का कम से कम 40% हिस्सा एन्युटी में लगाना अनिवार्य होगा। इससे निवेशकों को रिटायरमेंट के बाद नियमित मासिक या वार्षिक आय सुनिश्चित होगी।
युवा निवेशकों के लिए सुनहरा अवसर
एचडीएफसी पेंशन फंड के एमडी और सीईओ श्रीराम अय्यर का मानना है कि ये बदलाव खासकर युवाओं के लिए बहुत फायदेमंद रहेंगे। 100% इक्विटी में निवेश का विकल्प और 15 साल बाद निकासी की सुविधा रिटायरमेंट की तैयारी को और आसान बनाएगी। एनपीएस अब सिर्फ एक पेंशन स्कीम नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का भरोसेमंद साथी बनता जा रहा है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पीएफआरडीए की आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। निवेश करने से पहले किसी वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें और अपने जोखिम क्षमता के अनुसार निर्णय लें।
Shram Card : सिर्फ 5 स्टेप्स में पाएं ₹3000 महीने की पेंशन – मौका हाथ से न जाने दें!






