Personal Loan: आज के समय में अगर अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए तो लोग सबसे पहले लोन लेने के बारे में सोचते हैं। लेकिन सवाल यह होता है कि कौन-सा लोन लेना सही रहेगा—पर्सनल लोन या फिर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बदले लोन? बहुत कम लोगों को यह पता होता है कि आपकी बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट पर भी आप आसानी से लोन ले सकते हैं। आइए जानते हैं कि इन दोनों में क्या फर्क है और कौन-सा विकल्प आपके लिए ज़्यादा फायदेमंद है।
फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले लोन क्या होता है?
अगर आपके पास बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट है और अचानक पैसों की जरूरत पड़ गई है, तो आप उस FD को गिरवी रखकर बैंक से लोन ले सकते हैं। इसे Loan Against FD कहा जाता है। इस प्रक्रिया में आपको किसी अतिरिक्त दस्तावेज़ या गारंटी की जरूरत नहीं होती क्योंकि बैंक के पास पहले से आपकी जमा राशि होती है।
बैंक आमतौर पर आपकी FD की राशि का 80 से 90 प्रतिशत तक लोन देती है। इस लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आपकी FD पर ब्याज मिलता रहता है, यानी पैसा बंद नहीं होता। बैंक इस लोन पर FD ब्याज दर से सिर्फ 1-2% अधिक ब्याज लेती है। उदाहरण के तौर पर अगर आपकी FD पर 6% ब्याज मिल रहा है, तो लोन पर आपको करीब 7-8% ब्याज देना होगा। इसी वजह से यह सबसे सस्ता और आसान लोन विकल्प माना जाता है।
पर्सनल लोन में क्या होता है फर्क?
वहीं दूसरी ओर पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन होता है, यानी इसमें आपको कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखनी पड़ती। लेकिन चूंकि यह बिना गारंटी के दिया जाता है, इसलिए बैंक या NBFC इस पर 10% से 24% तक ब्याज दर वसूलते हैं। ब्याज दर आपके क्रेडिट स्कोर और आय प्रोफाइल पर निर्भर करती है। इसके अलावा, पर्सनल लोन की प्रक्रिया में थोड़ा समय भी लग सकता है क्योंकि बैंक को पहले आपकी पात्रता जांचनी होती है।
यहां सबसे बड़ा अंतर लोन की लागत (Borrowing Cost) का है। Loan Against FD में जहां ब्याज दर 7-8% तक रहती है, वहीं पर्सनल लोन में यह 24% तक पहुंच जाती है। यानी अगर आपके पास FD है, तो उसके बदले लोन लेना आपकी जेब के लिए कहीं ज्यादा सस्ता साबित हो सकता है।
लोन चुकाने की प्रक्रिया में कौन आसान है?
FD के बदले लोन चुकाना भी काफी आसान होता है। आप चाहें तो इसे किस्तों में चुका सकते हैं या एक साथ लंपसम अमाउंट देकर निपटा सकते हैं। अगर आप तय समय पर लोन नहीं चुका पाते, तो बैंक सीधे आपकी FD से वह राशि समायोजित कर लेती है। खास बात यह है कि इससे आपके क्रेडिट स्कोर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
वहीं, पर्सनल लोन में फिक्स्ड EMI होती है और अगर आप समय पर भुगतान नहीं करते तो पेनल्टी लगती है और आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है।
कौन-सा विकल्प है बेहतर?
अगर आपके पास पहले से एक फिक्स्ड डिपॉजिट है और अचानक पैसों की जरूरत पड़ गई है, तो FD के बदले लोन लेना सबसे बेहतर विकल्प है। यह सस्ता, आसान और तेज़ है। बैंक के पास आपकी पूरी जानकारी पहले से होती है, इसलिए लोन जल्दी मिल जाता है। लेकिन अगर आपके पास FD नहीं है, तो पर्सनल लोन ही एकमात्र विकल्प रहता है।
त्योहारों के इस सीजन में जब खर्च बढ़ जाते हैं, ऐसे में समझदारी यही है कि जरूरत और सुविधा के हिसाब से सही लोन विकल्प चुना जाए, ताकि भविष्य में किसी आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े।
डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य वित्तीय समझ के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों को जागरूक करना है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बैंक से परामर्श अवश्य लें।
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