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Radhakund Bathing and Ahoi Ashtami 2025: संतान सुख, भक्ति और आस्था का पवित्र पर्व

On: October 12, 2025 9:42 PM
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Radhakund Bathing and Ahoi Ashtami 2025

Radhakund Bathing and Ahoi Ashtami 2025: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर यह दिन भक्तों के लिए बेहद खास होता है। अहोई अष्टमी 2025 के साथ ही इस दिन कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भी मनाया जाएगा। ये तीनों पर्व श्रद्धा, भक्ति और आस्था का प्रतीक हैं, जो अलग-अलग मान्यताओं और पूजा विधियों के साथ मनाए जाते हैं। माताएं इस दिन अपने संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करते हुए निर्जल व्रत रखती हैं और तारों को देखकर अहोई माता की पूजा करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की पूजा से राहु समेत कई अशुभ ग्रहों के दोष दूर होते हैं और संतान व परिवार की सभी परेशानियां कम होती हैं।

अहोई अष्टमी का महत्व

अहोई अष्टमी का उल्लेख नारद पुराण और पद्म पुराण में मिलता है। नारद पुराण के अनुसार यह व्रत समृद्धि और दीर्घायु प्रदान करता है, जबकि पद्म पुराण इसे संतान की सुरक्षा और सुख-समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताता है। यह व्रत भोर से शुरू होकर संध्या समय तक निर्जल रखा जाता है और पारण तारों के दर्शन के बाद किया जाता है। कुछ स्थानों पर चंद्रमा के दर्शन के बाद भी व्रत खोला जाता है, लेकिन चूंकि चंद्रोदय देर से होता है, इसलिए तारों को देखकर व्रत खोलना प्रमुख माना जाता है।Radhakund Bathing and Ahoi Ashtami 2025

राधाकुंड में स्नान का विशेष महत्व

अहोई अष्टमी के दिन राधाकुंड में स्नान करने का विशेष महत्व है। यह उन दंपत्तियों के लिए और भी खास है जो संतान प्राप्ति में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। मान्यता है कि मध्यरात्रि के निशिता काल में राधाकुंड में डुबकी लगाने से राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। कई भक्त इस आस्था के साथ गोवर्धन आते हैं और कच्चे सफेद पेठे को लाल वस्त्र में सजाकर राधा रानी को अर्पित करते हैं। जिनकी मनोकामना पूरी होती है, वे दोबारा आकर आभार प्रकट करते हैं।

कालाष्टमी पर्व का महत्व

अहोई अष्टमी के साथ ही इस दिन कालाष्टमी का पर्व भी मनाया जाता है। शिव पुराण, नारद पुराण और आदित्य पुराण में इसका उल्लेख मिलता है। कालाष्टमी भगवान कालभैरव के अवतार और महत्व को दर्शाता है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भक्त भगवान कालभैरव की विधिवत पूजा करते हैं और उनकी कृपा से भय, शत्रु और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की कामना करते हैं।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

साथ ही इस दिन मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी मनाई जाती है। यह हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर होती है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद से दुखों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। ब्रह्ममुहूर्त में स्नान के बाद पूजा शुरू की जाती है। फूल, अक्षत और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं, धूप-दीप जलाकर बाल गोपाल की आरती की जाती है और माखन-मिश्री व मेवे का भोग लगाया जाता है। प्रसाद वितरण से पुण्य की प्राप्ति होती है।Radhakund Bathing and Ahoi Ashtami 2025

अहोई अष्टमी, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का यह पवित्र पर्व श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, आस्था और परिवार की खुशहाली का संदेश लेकर आता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। श्रद्धालु अधिक सटीक और आधिकारिक जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंडित या पंचांग का संदर्भ लें।

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Rishant Verma

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