Varinder Ghuman: कभी-कभी ज़िंदगी इतनी अनिश्चित होती है कि जो इंसान दूसरों को शक्ति और प्रेरणा देता है, वही अचानक हमें गहरी उदासी में छोड़ जाता है। अमृतसर के मशहूर बॉडीबिल्डर और अभिनेता विरेंद्र घुमन का 42 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार की शाम अमृतसर के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने से फिटनेस और सिनेमा की दुनिया में गहरा शोक फैल गया है।
बॉडीबिल्डिंग की दुनिया के सच्चे ‘शेर’
विरेंद्र घुमन ने 2009 में नेशनल बॉडीबिल्डिंग चैम्पियनशिप में ‘मिस्टर इंडिया’ का खिताब जीता था। यही नहीं, उन्होंने मिस्टर एशिया प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल कर भारत का नाम रोशन किया था। खास बात यह रही कि वे दुनिया के पहले प्रोफेशनल वेजिटेरियन बॉडीबिल्डर कहे जाते हैं — यानी बिना मांसाहार के उन्होंने वह शरीर और शक्ति बनाई, जिसकी मिसाल देना आज भी आसान नहीं है।
भारतीय फिटनेस को नई पहचान देने वाले पहले प्रो कार्ड विजेता
विरेंद्र घुमन वह पहले भारतीय थे जिन्होंने इंटरनेशनल फिटनेस एंड बॉडीबिल्डिंग फेडरेशन (IFBF) का प्रो कार्ड हासिल किया था। यह उपलब्धि किसी भी भारतीय बॉडीबिल्डर के लिए गर्व का विषय रही है। उन्होंने न सिर्फ अपने शरीर से बल्कि अपने समर्पण और अनुशासन से भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई।
फिल्मों और म्यूजिक वीडियोज़ से मिली नई पहचान
बॉडीबिल्डिंग में इतिहास रचने के बाद विरेंद्र घुमन ने फिल्मी दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने 2012 की पंजाबी फिल्म ‘कबड्डी वन्स अगेन’ में मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके बाद वे ‘Roar: Tigers of the Sundarbans’ (2014), ‘Marjaavaan’ (2019) और हाल ही में ‘Tiger 3’ (2023) में भी नज़र आए।
उनकी मजबूत काया और सच्चे पंजाबी अंदाज़ ने उन्हें दर्शकों के दिलों में जगह दिलाई।
निजी जीवन और अचानक आई दुखद ख़बर
विरेंद्र का परिवार अमृतसर में एक डेयरी फार्म चलाता है। कुछ साल पहले उनके छोटे भाई की एक हादसे में मृत्यु हो गई थी। बताया जा रहा है कि हाल ही में उनके एक बाइसेप्स में समस्या आई थी, जिसके लिए वे सर्जरी कराने गए थे। इसी दौरान उन्हें हार्ट अटैक आया और यह महान व्यक्तित्व दुनिया को अलविदा कह गया।
विरासत जो हमेशा जीवित रहेगी
विरेंद्र घुमन सिर्फ एक बॉडीबिल्डर या अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह एक प्रेरणा थे — उन सभी लोगों के लिए जो मानते हैं कि दृढ़ इच्छा शक्ति से कुछ भी संभव है। उन्होंने यह साबित किया कि एक शुद्ध शाकाहारी होकर भी आप दुनिया में अपनी पहचान बना सकते हैं।
उनका जाना न केवल पंजाब या भारत के लिए, बल्कि पूरी फिटनेस कम्युनिटी के लिए एक गहरा नुकसान है।
विरेंद्र घुमन ने अपनी मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से जो छाप छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
Disclaimer:
यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर लिखा गया है। इसमें व्यक्त की गई भावनाएं श्रद्धांजलि और सूचना के उद्देश्य से हैं। किसी भी तथ्यात्मक त्रुटि के लिए लेखक या प्रकाशक उत्तरदायी नहीं है।






