Violent Protests: लद्दाख में राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर बुधवार, 24 सितंबर 2025 को प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षक सोनम वांगचुक ने कहा कि “किसी को भी अंदाजा नहीं था कि ऐसा कुछ होगा।” उन्होंने यह बात तब कही जब “स्कूल की छात्राएं, कॉलेज के छात्र और संन्यासी” पुलिस के साथ भिड़ गए।
लेह में BJP कार्यालय के बाहर तनावपूर्ण माहौल
लेह शहर में BJP कार्यालय के बाहर हिंसक प्रदर्शन उस समय भड़क उठा जब लेह एपीक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने 35 दिन के भूख हड़ताल की। उनकी मांग थी कि केंद्र सरकार लद्दाख के लंबित मुद्दों पर “परिणाम-उन्मुख” बातचीत करे, जिसमें राज्य का दर्जा और क्षेत्र को छठा अनुसूची (Sixth Schedule) देने की मांग शामिल है।
सोनम वांगचुक ने कहा कि आज लद्दाख में जनरेशन Z का जुनून देखने को मिला। “वे किसी की नहीं सुन रहे थे और गोलियों से भी नहीं डर रहे थे। यह पांचवीं बार है जब हम भूख हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन आज शांतिपूर्ण विरोध हिंसक हो गया।” उन्होंने यह भी बताया कि युवाओं ने पिछले कुछ दिनों से यही कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध काम नहीं कर रहा है।
हिंसा के पीछे गुस्से की वजह
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब एक दिन पहले दो प्रदर्शनकारी अस्पताल में भर्ती हुए। वांगचुक ने कहा कि गृह मंत्रालय ने भूख हड़ताल शुरू होने के 15 दिन बाद बातचीत की तारीख दी। यह युवाओं के गुस्से का बड़ा कारण बना। “छठा अनुसूची आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पांच साल पहले था। 2020 में इसी तरह की परिस्थितियों में दिल्ली से विशेष विमान भेजकर हमारे नेताओं से बातचीत कराई गई थी। बातचीत की तारीख में देरी ने युवाओं को और गुस्सा दिलाया।”
युवाओं की भागीदारी ने बढ़ाया तनाव
सोनम वांगचुक ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने शांतिपूर्ण विरोध को विफल कर दिया और युवाओं को हिंसक होने के लिए मजबूर किया। “आज हमने जिन जनरेशन Z के चेहरों को देखा, उन्हें कभी नहीं देखा था। अब तक हमारे पास शिकायत थी कि युवा हिस्सा नहीं ले रहे, केवल बुजुर्ग शामिल थे। आज युवा सहभागिता हमारी कल्पना से परे थी।”
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का लद्दाख में इतना प्रभाव नहीं कि हजारों लोग उनके बुलावे पर सड़कों पर उतर जाएं। लद्दाख के निवासियों ने, जिन्हें चीन की सीमा के पास सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार चाहिए, भूख हड़ताल की थी।
केंद्र की पहल और पिछली बातचीत
जनवरी 2023 में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी, जो लद्दाख के लोगों की चिंताओं का समाधान करने के लिए बनाई गई थी। इसे नवंबर 2023 में पुनर्गठित किया गया, लेकिन मार्च 2024 में बातचीत टूट गई। फिर दिसंबर 2024 में चर्चा शुरू हुई और 27 मई 2025 को अंतिम राउंड हुआ।
अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध समाचार स्रोतों और अधिकारिक रिपोर्ट्स पर आधारित है। प्रदर्शन और बातचीत से जुड़ी घटनाएं समय के साथ बदल सकती हैं।
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